iNetDoc

کامل ترین منبع دانلود مقاله و تحقیق

پایان نامه تعيين آستانه خشکسالي و محاسبه ميزان بارش قابل اعتماد در حوضه مارون

نوع : word - قیمت :24000 تعداد صفحه : 134

بخشی از پایان نامه : 

 

عنوان                                                                                                                          صفحه

چکيده-------------------------------------------------------------------- 1

فصل اول:----------------------------------------------------------------- 2

مقدمه-------------------------------------------------------------------- 3

1-1 اهميت و ضرورت تحقيق---------------------------------------------------- 4

1-2 بيان مسئله-------------------------------------------------------------- 4

1-3 اهداف تحقيق------------------------------------------------------------ 7

1-4 فرضيات تحقيق----------------------------------------------------------- 7

1-5 سوالات تحقيق:----------------------------------------------------------- 7

1-6 موقعيت منطقه مطالعاتي----------------------------------------------------- 8

1-6-1 زمين شناسي---------------------------------------------------------- 11

1-6-2 منابع آب شبکه رودخانه اي------------------------------------------------ 13

1-6-3 پوشش گياهي--------------------------------------------------------- 13

1-7 مراحل تحقیق----------------------------------------------------------- 14

1-8 روش تحقیق------------------------------------------------------------ 14

1-9 روش جمع آوری اطلاعات-------------------------------------------------- 15

1-10 ابزار جمع آوری اطلاعات-------------------------------------------------- 15

1-11 روش تجزیه و تحلیل اطلاعات:---------------------------------------------- 16

1-12 تعاریف واژه های اصلی تحقیق----------------------------------------------- 16

فصل دوم:---------------------------------------------------------------- 17

2-1 پیشینه مطالعات در ایران---------------------------------------------------- 18

2-2 پیشینه مطالعات در جهان---------------------------------------------------- 28

فصل سوم---------------------------------------------------------------- 31

3-1- تجزيه و تحليل پديده خشكسالي----------------------------------------------- 32

3-2- خشکسالي در قرآن------------------------------------------------------- 32

3-3- خشکي وخشکسالي------------------------------------------------------- 33

3-4- تعريف عملي خشكسالي--------------------------------------------------- 36

عنوان                                                                                                                          صفحه

3-5- انواع خشکسالي--------------------------------------------------------- 39

3-5-1- خشكسالي اقليمي(هواشناسي):---------------------------------------------- 39

3-5-2- خشکسالي کشاورزي---------------------------------------------------- 39

3-5-3- خشكسالي هيدرولوژيك:------------------------------------------------- 40

3-5-4- خشكسالي هيدرولوژيكي و آمايش سرزمين(کاربري اراضي)--------------------------- 40

3-5-5- خشكسالي اقتصادي- اجتماعي (قحطي)--------------------------------------- 41

3-6- روند تاثيرات خشکسالي---------------------------------------------------- 41

3-7- ويژگيهاي فضايي و زماني خشكسالي------------------------------------------- 44

3-7-1- آغاز و خاتمه خشكسالي:------------------------------------------------- 44

3-7-2- شدت خشکسالي:------------------------------------------------------ 44

3-7-3- فراواني خشکسالي------------------------------------------------------ 44

3-7-4- وسعت منطقه اي خشكسالي----------------------------------------------- 44

3-8- علل وقوع خشکسالي----------------------------------------------------- 45

3-9- روشهاي مطالعه خشكسالي ها------------------------------------------------ 46

3-9-1- روشهاي مطالعه بيلان آبي------------------------------------------------ 46

3-9-2- روشهاي تحليل جريان-------------------------------------------------- 48

3-10- روش هاي تعيين برخي از شاخص هاي خشکسالي--------------------------------- 49

فصل چهارم:--------------------------------------------------------------- 58

4-1- مقدمه--------------------------------------------------------------- 59

4-2- ويژگيهاي اقليمي حوضه مارون----------------------------------------------- 60

4-2-1- ساعات آفتابي-------------------------------------------------------- 60

4-2-2- ابرناکي------------------------------------------------------------- 61

4-2-3- دماي کمينه---------------------------------------------------------- 63

4-2-4- دماي بيشينه--------------------------------------------------------- 64

4-2-5- دماي ميانگين-------------------------------------------------------- 65

4-2-6- نم نسبي------------------------------------------------------------ 67

4-2-7- مقدار بارش--------------------------------------------------------- 68

عنوان                                                                                                                          صفحه

4-2-8- باد--------------------------------------------------------------- 70

4-3- طبقه بندي اقليمي حوضه مارون---------------------------------------------- 71

4-4-تعيين آستانه خشکسالي و محاسبه ميزان بارش قابل اعتماد در حوضه مارون------------------ 73

4-4-1- داده ها و روش شناسي-------------------------------------------------- 73

4-4-2- شاخص هاي تعيين خشکسالي--------------------------------------------- 75

4-4-3- ويژگي آماري بارش---------------------------------------------------- 78

4-4- محاسبه نمايه DR و تعيين خشکسالي ها---------------------------------------- 78

4-5- پهنه بندی خشکسالی حوضه مارون-------------------------------------------- 93

فصل پنجم:--------------------------------------------------------------- 106

5-1- نتيجه گيري----------------------------------------------------------- 107

5-2- آزمون فرضيات ‌-------------------------------------------------------- 107

5-3- پيشنهادها------------------------------------------------------------ 108

منابع و مآخذ-------------------------------------------------------------- 112

 

 

 

چکيده

     قرن 21 چالشهاي بسيار زيادي پيش روي دارد که تغييرات اقليمي و پيامدهاي آن چون خشكسالي از مهمترين مظاهر آن است. در پژوهش حاضر به منظور تعيين آستانه خشکسالي و محاسبه ميزان بارش قابل اعتماد در حوضه مارون داده هاي بارش سالانه 8 ايستگاه طي دوره زماني 18 ساله (89-1372) انتخاب گرديد. در ادامه به کمک نرم افزار SPSS ابتدا مشخصات آماري بارش ايستگاهها شامل ميانگين، ميانگين هندسي، انحراف معيار و ضريب تغييرات براي تمامي ايستگاهها تعيين گرديد. سپس براساس آستانه هاي بارشي حاصل، سالهاي رخداد خشکسالي، نرمال و ترسالي ايستگاهها براي هر يک از شاخصها. DRI،PNPI  وZSLAP محاسبه گرديد.

     بررسيها نشان داد که عليرغم همگونی نسبتاً زياد نتايج حاصل از دو شاخص  DRIو ZSIAP، در اکثر ايستگاهها شاخص بارش قابل اعتماد DRI (با لحاظ نمودن آستانه هاي پايين تر براي رخداد خشکسالي) با آشکار نمودن شديدترين خشکساليها و ارائه مقدار بارش قابل حصول مطمئنتر، قابليت بيشتري از ديگر شاخصها دارد. لازم به ذکر است که شاخص ZSIAP را مي توان نامطمئن ترين شاخص برآورد بارش قابل اعتماد براي حوضه در نظر گرفت. مقادير محاسبه شده DRI در محدوده مورد مطالعه نشان داد که ايستگاههای بهبهان و دوگنبدان با 89 درصد با اعتمادترين و ايستگاه هاي سد وآغاجاری با کمتر از70 درصد کم اعتمادترين ايستگاهها براي برآورد بارش قابل اعتماد و برنامه ريزي مي باشند. مقادير محاسبه شده شاخص PNPI نشان داد که ايستگاههای بهبهان و دوگنبدان با 89 درصد با اعتمادترين و ايستگاه هاي سد وآغاجاری با کمتر از 61درصد کم اعتمادترين ايستگاهها براي برآورد بارش مي باشند. مقادير محاسبه شده ZSIAP آشکار نمود که ايستگاههای چم نظام، بهبهان و دوگنبدان با 77 درصد با اعتمادترين و ايستگاههای سد بهبهان، رامهرمز و آغاجاری با 55تا 61 درصد کم اعتمادترين ايستگاهها براي برآورد بارش مي باشند.

     بررسيها آشکار نمود که شديدترين خشکساليها در ايستگاههاي مناطق جنوبی و جنوبغربی حوضه اتفاق افتاده است. در سالهای 1372، 1385 ،1375، کل حوضه در شرايط ترسالی قرار داشته است. طی سالهای1389 و 1387 تقريباً تمام حوضه شرايط خشکسالی را تجربه نموده است. مرطوبترين و خشکترين سالها طي دوره مطالعاتي به ترتيب سالهاي 1375 با متوسط بارندگي 549 ميليمتر و1387 با متوسط بارندگي 189 ميليمتر در ايستگاههاي حوضه رخداده است.

 

واژگان کلیدی:شاخص DR ، بارش قابل اعتماد، خشکسالی، حوضه آبریز مارون.

 

 

فصل اول:

کلیات تحقیق

مقدمه

1-1 اهميت و ضرورت تحقيق  

1-2 بيان مسئله

1-3 اهداف تحقيق

1-4 فرضيات تحقيق

1-5 سوالات تحقيق

1-6 موقعيت منطقه مطالعاتي

1-7 مراحل تحقیق

1-8 روش تحقیق

1-9 روش جمع آوری اطلاعات

1-10 ابزار جمع آوری اطلاعات

1-11 روش تجزیه و تحلیل اطلاعات

1-12 تعاریف واژه های اصلی تحقیق

 

 

 

 

 

 

 

 

 

مقدمه

     خشكسالي به عنوان بلاي طبيعي و پديده‌اي اجتناب‏ناپذير، از ديرباز در پهنه وسيع كشورهاي مختلف به خصوص كشورهاي مستقر در مناطق گرم و خشك به كرات وقوع يافته و مي‌يابد. مطالعات و بررسي هاي انجام شده نشانگر آن است که كشور ايران با توجه به وضعيت جغرافيايي و اقليمي خود، همچون بسياري از كشورهاي منطقه خاورميانه و شمال آفريقا در وضعيت مناسبي از لحاظ تأمين آب قرار ندارد. اين امر، بيانگر احتمال وقوع خشكسالي هاي بيشتري در آينده نسبت به گذشته مي باشد. قدر مسلم آنکه، در صورت اعمال مديريتهاي ناكارآمد فني و استفاده از استراتژي هاي نامناسب، علاوه بر هدر رفت منابع موجود و تشديد اثرات مخرب خشكسالي، زمينه براي بروز خشكسالي هاي بعدي به طرز فزاينده اي فراهم مي گردد.

     خشکسالي حالتي نرمال و مستمر از اقليم است. گرچه بسياري به اشتباه آن را واقعه اي تصادفي و نادر مي پندارند. اين پديده تقريباً در تمامي مناطق اقليمي رخمي دهد، گرچه مشخصات آن از يک منطقه به منطقه ديگر کاملاً تفاوت مي کند. خشکسالي يک اختلال موقتي است و باخشکي تفاوت دارد چرا که خشکي صرفاً محدود به مناطقي با بارندگي اندک است و حالتي دائمي از اقليم ميباشد.

    خشکسالي در کل حاصل کمبود بارش در طي يک دوره ممتد زماني معمولاً يک فصل يا بيشتر مي باشد. اين کمبود منجر به نقصان آب براي برخي فعاليت ها، گروهها ويا يک بخش زيست محيطي مي شود. ساير فاکتورهاي اقليمي نظير دماي بالا، باد شديد و رطوبت نسبي پايين تر غالباً در بسياري از نقاط جهان با اين پديده همراه شده و مي توانند به طرزقابل ملاحظه بر شدت آن بيفزايند.

      اين پژوهش در5 فصل گردآوري شده است که هر کدام از فصل ها با ديگري مرتبط است. در فصل اول مانند ساير پژوهش ها به شرح کليات (بيان مسئله، هدف تحقيق، فرضيه هاي تحقيق و...)پرداخته شده است.

      فصل دوم به پيشينه تحقيق اختصاص يافته است.

     در فصل سوم پژوهش مباني تئوري تحقيق مورد بررسي قرار گرفته است.

      در فصل چهارم ضمن توجه به خصوصيات اقليمي، آستانه خشکسالي و محاسبه ي ميزان بارش قابل اعتماد در حوضه مارون تعيين و مورد تحليل قرار گرفته است. در نهايت در فصل پنجم نتايج، راهکارها و کاربردهاي اين پژوهش مشخص شده است.

 

 

1-1 اهميت و ضرورت تحقيق  

     يکي از مؤثرترين عوامل بر حيات يک منطقه، نوع اقليم آن منطقه است به طوري‌که پراکندگي انواع گياهان و جانوران، ارتباط تنگاتنگي با وضعيت اقليمي هر منطقه دارد. لذا شناخت نوع اقليم يک منطقه و عناصر غالب مؤثر بر آن که تعيين کننده اقليم آن منطقه است، مي‌تواند برنامه ريزان را ياري نمايد تا در انجام پروژه‌ها و برنامه ريزيهاي کلان، با توجه به نوع اقليم و عناصر غالب بتوانند درک صحيحي از شرايط اقليمي منطقه بدست آورند و به برنامه ريزي بپردازند.

     حوضه آبي مارون همواره يکي از حوضه هاي مخاطره آميز کشور بوده است. شايد يکي از دلايل عمده آن، عدم درک و شناخت صحيح از شرايط جوي آن و ويژگيهاي مناطق مختلف حوضه با توجه به عناصر جوي غالب برآن بوده است. آنچه امروزه توجه بيشتر به وضعيت اقليمي حوضه را ضروري مي‌سازد؛ تغييرات کاربري اراضي، افزايش جمعيت، اجراي طرحهاي صنعتي، افزايش نياز به مصرف آب در بخشهاي مختلف اقتصادي در منطقه است که هماهنگي خاصي با شرايط اقليمي و طبيعي حوضه را مي طلبد. اين حوضه آب و هوايي خشک و نيمه خشک دارد و همواره در معرض خطر پديده ي خشکسالي بوده است. تعيين آستانه خشکسالي ميزان بارش قابل اعتماد در ايستگاههاي مختلف آن ميتواند در تعديل آثار زيان بار اين پديده نقش موثري داشته باشد و بعنوان يک ملاک و معيار در برنامه ريزي هاي مختلف کشاورزي، عمراني، هيدرولوژيکي و... مورد استفاده قرار گيرد.

 

1-2 بيان مسئله

    پديده خزنده و مخرب خشکسالي در طول ادوار تاريخي خسارات فراواني در ايران به بار آورده است. يکي از مهمترين اسناد موجود در بارۀ خشکسالي در ايران کتيبه اي از داريوش در تخت جمشيد است که در آن از خشکسالي به عنوان دومين معضل ايران ياد شده است (قويدل رحيمي ،1381).

 

کتيبۀ داريوش کبير در تخت جمشيد (قويدل رحيمي، 1381، الف : به نقل از از فرهنگ نامۀ بريتانيکا)

     بر همين اساس همه مردم کمابيش با خشکسالي و اثرات آن آشنا بوده و در هنگام بروز خشکسالي هاي شديد آن را لمس نموده اند ولي تعيين شدت خشکسالي ونحوه ارزيابي آن در هر منطقه همچنان يکي از مسايل مهم باقي مانده است.خود خشکسالي نيز به دليل نوع تاثير آن در بخش هاي مختلف داراي تعريف واحدي نبوده ودر هر بخش تعريف جداگانه اي از آن شده است (فراشياني، 1384). از ميان 43 نوع بلاياي طبيعي موجود درجهان ،34 نوع آن در کشور ما رخ مي دهد که خشکسالي يکي از مهمترين آنها مي باشد. خشکسالي با خطرات طبيعي ديگر متفاوت است. چون تعيين دقيق شروع و پايان خشکسالي کاري مشکل است و گستردگي جغرافيايي آن در سطحي وسيع مي باشد (1989،Changnon).

     خشکسالي، کاهش و بي نظمي بارندگي است به نحوي که روند عادي رشد، حيات و توليد محصول ورابطه متوازن و متعارف انسان ومحيط مختل گردد. خشکسالي ويژگي دائمي يک منطقه نيست و ويژگي هاي آن از نقطه اي به نقطه ديگر، کاملا متغير و متمايز است. بارش عمده ترين پارامتري است که در تعريف خشکسالي به کار مي رود و کمبود يا فقدان آن آستانه رخداد خشکسالي است (فرج زاده، 1384). بررسي نوسان بارش از مهمترين مسائل اقليمي در ايران محسوب مي شود، زيرا توزيع زماني و مکاني بارش در کشور ناموزون مي باشد(عليجاني، 1381). آثار زيانبار آن در تمام عرصه هاي اقتصادي و اجتماعي و حتي سياسي- امنيتي (تشديد نزاع بر سر تملک آب در ادوار خشکسالي) به نحو ي منعکس مي شود. سيل، بارش، برف و باران سنگين، تگرگ و خشکسالي مهمترين پديده هاي زيان بار ناشي از بارش در کشور هستند و خسارات سنگيني بر پيکر نحيف اقتصاد ملي وارد مي سازند .در ميان مسايل ناشي از بارش، خشکسالي هم از نظر شدت و فراواني وقوع و هم از نظر وسعت فضايي و ميزان خساراتي که به بار مي آورد، اهميت بيشتر دارد (قويدل رحيمي،1386).

     در ايران نيز هيچ نقطه اي از کشور در برابر بروز پديده خشکساليها در امان نيست و پيوسته در اغلب سالها مناطقي از کشور با پديده خشکسالي مواجه مي شوند، در اين ميان حتي سواحل جنوبي درياي خزر که داراي بيشترين ميزان دريافت بارش در گستره کشور مي باشند نيز از اين قائده مستثني نمي باشند. طي سالهاي مختلف نوسانات بارش، نيز باعث بروز خسارت و وارد شدن ضربات سهمگين بر پيکره اقتصاد کشاورزي و محيط زيست مي گردد؛ بنابراين بررسي و شناخت دوره هاي مرطوب و خشک و پيش بيني آنها، خود باعث کاهش اثرات خشکسالي و خسارات وارده بر محيط زيست و مردم منطقه خواهد شد.

خشکسالي فرآيندي است که معلول تغييرات آب و هوايي بوده و نوسانات ريزشهاي جوي همواره نقش مهمي در پديد آمدن آن داشته است. از ديدگاه اقليم شناسان خشكسالي يك پديده طبيعي است كه در اثر تغييرات الگوههاي آب و هوايي ناشي از كاهش نزولات جوي كمتر از حد معمول خود به خود به وجود مي آيد و ادامه آن موجب عدم تعادل اكولوژيكي و هيدرولوژيكي مي شود. بررسي علمي اين بلاياي طبيعي و انجام مطالعات مستمر و پژوهشهاي دقيق توسط محققين و پژوهشگران مربوطه بسيار مهم و ضروري و يکي از نيازهاي مهم و اساسي جهت انجام برنامه ريزي هاي آتي کشور مي باشد تا جهت بهره برداري بهينه از منابع آب و خاک در اقاليم مختلف مورد استفاده قرار گيرد. کمبود ريزشهاي جوي مورد انتظار در يک سال نسبت به ميزان متوسط بارندگي در يک منطقه را خشکسالي مي گويند که در هر نوع اقليمي اعم از خشک تا مرطوب حاره قابل رويت مي باشد پديده خشکسالي با خشکي تفاوت دارد چرا که خشکي صرفا محدود به مناطقي با بارندگي اندک بوده و حالت دائمي از اقليم مي باشد. افزايش بيش از حد ميانگين بارش باعث ترسالي و کمبود کمتر از متوسط بارش مورد نياز يکسال نسبت به قبل باعث خشکسالي مي شود. اين نوسانات بر حيات بشر و ديگر جانوران تاثير مي گذارد و زماني ابعاد وسيعتري مي گيرد که داراي ابعاد اقتصادي و اجتماعي باشد. خشکسالي پديده خزنده اي است که به آرامي وارد يک منطقه مي شود و اثرات مخربي را از خود به جاي مي گذارد که تا مدت ها بعد از وقوع خشکسالي هم پيدا مي کند. از ديدگاه جغرافيايي تعريف خشكسالي مفهومي مكان مند مي باشد، شدت خشكسالي در هر محل تابعي از ضريب تغييرپذيري بارش در همان محل است؛ بنابراين از نظر اقليم شناسي خشكسالي قابل تعيين است به طوري كه در اين روش درجه خشكسالي و ترسالي تعيين مي گردد. کشور ما در يکي از مناطق خشک و نيمه خشک جهان قرار گرفته است و خشکي جز فطرت و صفت ذاتي آن است. تغييرات شديد مقدار بارش و شدت و پراکنش زياد بارندگي از خصوصيات دائمي اين مناطق است، اثرات خشکسالي در ابعاد مختلف برنامه ريزيهاي توسعه کشور را دچار رکود نموده و بحرانهاي گسترده سياسي و اجتماعي و اقتصادي در نواحي مختلف کشور ايجاد مي کند. آثار خسارات خشکسالي در سالهاي اخير منابع آب، کشاورزي، توليدات، مراتع، مهاجرت و طغيان آفات و بيماريهاي گياهي بسيار زياد بوده است. بر اين اساس از آن جايي که حوضه آبريز مارون جزء حوضه هاي مهم آبي ايران و استان خوزستان مي باشد و نقش مهمي در بخش کشاورزي و توليد انرژي دارد در پژوهش حاضر سعي بر آن است تا ضمن محاسبه ميزان بارش قابل اعتماد، آستانه هاي خشکسالي در حوضه مارون تعيين گردد تا در سال هاي خشک و کم آب راهگشاي برنامه ريزي درون حوضه اي و منطقه اي باشد.

 

1-3 اهداف تحقيق

     حوضه آبي خليج‌فارس پرآبترين حوضه کشور است. به همين سبب پرآبترين رودخانه‌هاي ايران در همين حوضه جريان دارند. آب رودخانه‌هاي اين حوضه از يکسو ناشي از ذوب برف و از سوي ديگر ناشي از ريزشهاي مايع است. تغييرات الگوي زماني بارش نيز مستقيماً روي الگوي آبدهي رودخانه ها بازتاب پيدا مي‌کند. شناخت ويژگيهاي طبيعي هر منطقه، خصوصاً آب و هوا مي‌تواند در امر برنامه‌ريزي آمايش آن سرزمين نقش عمده‌اي ايفا نمايد. در اين راستا شناسايي رخدادهاي نشان دهنده تغييرات اقليمي چون سيل، خشکسالي و ... در مقياس زماني و مکاني جهت دستيابي به توسعه همه جانبه در ابعاد سلسله مراتبي محلي- ملي و منطقه اي ضروري مي‌باشد. بر اين اساس هدف پژوهش حاضر اين استکه با توجه به وجود توانهاي محيطي، اقتصادي، کشاورزي و صنعتي در حوضه مارون و مناطق پيراموني، مطمئن ترين شاخص برآورد بارش قابل اعتماد در حوضه را تعيين و معرفي نمايد.

 

1-4 فرضيات تحقيق

1- DRI مطمئن ترين شاخص برآورد بارش قابل اعتماد در حوضه مارون است.

2- شرايط خشکسالي در ايستگاه هاي جنوبي حوضه مارون شديدتر است.

 

1-5 سوالات تحقيق:

     در مطالعه حاضر، اين سوالات مطرح مي گردد:

1- مطمئن ترين شاخص برآورد بارش قابل اعتماد و در حوضه مارون کدام شاخص است؟

2- توضيح زماني- مکاني خشکسالي در حوضه مارون چگونه است؟

 

1-6 موقعيت منطقه مطالعاتي

     از نظر اقليم شناسي، سياره زمين بر حسب شرايط آب و هوايي به چند منطقه مداري تقسيم مي‌شود که از صفر تا 90 درجه از مدار استوا به طرف قطب را شامل مي‌گردد. اين نوارها عبارتند از: نوار آب و هواي استوايي، حاره، جنب حاره، معتدله جنب قطبي و منطقه قطبي.

     حوضه مارون به طور کامل، در نزديکي كمربند پرفشار جنب حاره قرار گرفته است در نتيجه انتطار مي رود در زمره مناطق خشك ونيمه خشک محسوب شود. اما عامل ترفيع مكاني در غالب بخشهاي حوضه بگونه اي ملموس قانون فرا مداري منطقه فوق حاره را نقص و منجر به تعديل آن گشته است در نتيجه ارتفاع نقش عمده اي در تعديل خشكي ايفا نموده است. در واقع بايد گفت حوضه مارون در نيمة شمالي کره زمين و نيمکره شرقي در منطقة جنب حاره در خاورميانه و در ناحية جنوبي کشور ايران واقع شده است.

     حوضه هاي آبي ايران را مي توان به شش حوضه بزرگ آبريز تقسيم نمود كه شامل حوضه هاي آبريز درياي خزر، خليج فارس و درياي عمان، درياچه اروميه، ايران مركزي، درياچه هامون و سرخس است. بزرگترين حوضه آبريز كشور ايران حوضه آبريز خليج فارس و درياي عمان است كه بيشتر قسمتهاي جنوبي و غربي و جنوب غرب كشور را شامل مي شود كه يکي از رودخانه هاي جنوبغربي ايران يعني مارون در آن جريان دارد. رودخانه مارون از ارتفاعات زاگرس مياني و جنوبي سرچشمه مي گيرد و پس از ورود به جلگه خوزستان به تالاب شادگان مي ريزد.

     رودخانه جراحی از دو شاخه مهم و عمده مارون و الله تشکيل شده  است. رودخانه مارون از كوه هاي نيل و چشمه سارهاي دامنه كوه هاي سادات از ارتفاعات زاگرس سرچشمه گرفته و به هور شادگان مي ريزد. حوضه آبريز اين رودخانه با مساحت3824 کيلومتر مربع در مختصات جغرافيايي 50، 49  تا 10 ، 51 طول شرقي و 30، 30 تا 20، 31 عرض شمالي و در ارتفاعات شهرستان بهبهان واقع شده است. حدود 20 درصد مساحت اين حوضه را ارتفاعات بيش از 1000 متر و كوهستان هايي تشكيل داده اند كه نقش اساسي در ايجاد آب سطحي حوضه دارند. اين حوضه به دليل كمي پوشش گياهي در ارتفاعات و شيب زياد و همچنين سازندهاي زمينشناختي مركب از رسوبات تبخيري و مارن، فرسايش پذير بوده و در نتيجه رسوب رودخانه بسيار زياد ميباشد. حوضه آبريز مارون توسط حوضه هاي آبريز رودخانه هاي زهره و كارون در استانهاي خوزستان و كهگيلويه و بويراحمد احاطه گرديده است (معروفي،1390).

 



نوع فایل : word
اندازه فایل : 134
قیمت : 24000
خرید